Apr 21, 2026

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त होने को, संबद्धता न मिलने से परीक्षा संचालन पर पड़ेगा असर

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उत्तराखंड में एक अप्रैल से नए शिक्षा सत्र का आगाज हो चुका है, लेकिन प्रदेश की मदरसा शिक्षा व्यवस्था वर्तमान में एक बड़े शून्य और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। आलम यह है कि राज्य के 452 मदरसों में से अब तक एक भी मदरसे को उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता नहीं मिल पाई है। इतना ही नहीं, किसी भी मदरसे को अब तक 'उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' से मान्यता प्राप्त संस्थान का दर्जा भी नहीं मिला है।

मदरसों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आगामी 1 जुलाई को वर्तमान मदरसा बोर्ड का अस्तित्व समाप्त होने जा रहा है। सरकार के निर्णय के अनुसार, अब इन मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने के लिए उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध होना अनिवार्य है। लेकिन सत्र शुरू हुए तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद आधिकारिक आंकड़ों में 'संबद्धता' का खाता तक नहीं खुला है। ऐसे में हजारों छात्रों के भविष्य और उनकी पढ़ाई के सुचारु संचालन पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रदेश के प्रमुख जिलों हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून में से केवल हरिद्वार जिले के 10 मदरसों ने ही अब तक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान की मान्यता के लिए आवेदन किया है। शेष जिलों से प्रतिक्रिया न के बराबर है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण को आवेदन तो मिल रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या कुल मदरसों के मुकाबले बेहद कम है। संबद्धता न मिलने का एक बड़ा कारण कड़े मानक भी माने जा रहे हैं। उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद सिमल्टी ने पुष्टि की है कि अभी तक किसी भी मदरसे को बोर्ड की ओर से हरी झंडी नहीं दी गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मान्यता और संबद्धता की प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी और मानक-आधारित है। केवल उन्हीं मदरसों को अनुमति मिलेगी जो बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता और अन्य अनिवार्य मानकों को पूरा करेंगे। मदरसा बोर्ड के खत्म होने की ओर बढ़ते कदमों के बीच, यदि समय रहते संबद्धता की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो शैक्षणिक सत्र 2026-27 के छात्रों का पंजीकरण और परीक्षा संचालन बाधित हो सकता है। फिलहाल विभाग का दावा है कि प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी सुस्ती ने मदरसा संचालकों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।