Aug 28, 2026

रुद्रपुर मदरसा विवाद: भड़काऊ बयानबाजी पर भड़के सीएम धामी, कहा-उत्तराखंड में गुंडागर्दी और तुष्टिकरण बर्दाश्त नहीं, सख्त कार्रवाई होगी

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रुद्रपुर में मदरसों को लेकर एक मौलाना के कथित विवादित बयान के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाया है।  मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि धमकी देने वालों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में इस प्रकार की बयानबाजी और समाज में भय का माहौल पैदा करने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी विचारधारा का प्रश्न है जो संविधान और कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का शासन सर्वोपरि है और किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने अथवा किसी को धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

धामी ने कहा कि पहले तुष्टिकरण की राजनीति के कारण ऐसे लोगों को संरक्षण मिलने की बातें सामने आती थीं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। सरकार संविधान के अनुरूप कार्य कर रही है और उत्तराखंड में किसी भी तरह की धमकी, दबाव या भय का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन-जिन स्थानों पर इस तरह के बयान दिए गए हैं, वहां प्रशासन संबंधित लोगों को चिन्हित करेगा। कानून के दायरे में रहते हुए दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी स्थिति में सामाजिक सौहार्द प्रभावित न होने देने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कानून के शासन को मजबूती मिली है। उत्तराखंड में भी सरकार की प्राथमिकता संविधान और कानून के अनुसार व्यवस्था संचालित करना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान, पद या प्रभाव चाहे जो भी हो, कानून सभी के लिए समान है।मुख्यमंत्री धामी ने राज्य में सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब तक 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। देवभूमि में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराना है। इसके लिए प्रशासन को कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भड़काऊ अथवा धमकी भरे बयानों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। साथ ही, किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। सरकार का कहना है कि प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।