देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संपत्ति विवरण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा न देने वाले कार्मिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अब प्रत्येक कर्मचारी को अपनी वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) में यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि उन्होंने संपत्ति का विवरण जमा कर दिया है, अन्यथा संबंधित नियंत्रक अधिकारी एसीआर स्वीकार नहीं करेगा। निदेशक समिति की ओर से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे, जिनमें सभी अधिकारी और कर्मचारियों को 28 फरवरी तक अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया था। नियमों के अनुसार समूह ‘क’, ‘ख’ एवं ‘ग’ के सभी कार्मिकों को प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक की स्थिति का विवरण अगले वर्ष 31 जनवरी तक अपने नियुक्ति प्राधिकारी को देना अनिवार्य है। वहीं जिन कर्मचारियों, जैसे अवर अभियंता और लेखा संवर्ग, की सेवा फाइलें मुख्यालय स्तर पर रखी जाती हैं, उन्हें 28 फरवरी तक अपना विवरण मानव संसाधन अनुभाग में पहुंचाना होगा।
यूपीसीएल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवरण में “विगत वर्ष के अनुसार” या “कोई परिवर्तन नहीं” जैसे सामान्य वाक्यांशों का प्रयोग स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रत्येक कर्मचारी को हर वर्ष अपनी संपत्तियों का पूर्ण और विस्तृत ब्यौरा देना होगा, चाहे उसमें कोई बदलाव हुआ हो या नहीं। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने कहा कि निर्धारित समय के भीतर संपत्ति विवरण न देना आचरण नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कार्मिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह आदेश उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड कार्मिक आचरण विनियमावली-2025 के नियम-22 के तहत जारी किया गया है। इसके तहत न केवल स्वयं अर्जित संपत्तियां, बल्कि दान में प्राप्त संपत्ति तथा परिवार के आश्रित सदस्यों के नाम दर्ज चल-अचल संपत्तियां भी विवरण के दायरे में आएंगी। प्रबंधन का मानना है कि संपत्ति विवरण की नियमित और विस्तृत सूचना से संस्थान में पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी और समय सीमा का सख्ती से पालन कराया जाएगा। यूपीसीएल के इस निर्णय से साफ है कि निगम अब कार्मिकों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाने के मूड में है।